ज़िंदगी भी कहाँ तक सितम ढहाएगी,🧎🚶🏃⛹️🤾
ज़िंदगी भी कहाँ तक सितम ढहाएगी,गुज़री है, गुज़र रही है, गुज़र जाएगी ।।
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ज़िंदगी भी कहाँ तक सितम ढहाएगी,गुज़री है, गुज़र रही है, गुज़र जाएगी ।।
सारी गवाहियाँ… तो मेरे हक़ में आ गईं…लेकिन, मेरा बयान ही… मेरे ख़िलाफ़ था…!!
जीने की लत पड़ी नहीं… शायद इसीलिए…झूठी तसल्लियों पे… गुज़ारा नहीं किया…!!
उधेड़ बुन में कट रही है ज़िन्दगी…मुझसे अपने ही ताने बाने… सुलझाए नहीं जाते…!!
कहती है अपनी बात… अब अपनी तरह से वो…औरत ने फेंक दी हैं… ज़ुबानें उधार की…!!
उन पंछियों 🐦को कैद में रखना आदत नहीं हमारी,जो हमारे दिल💓 के पिंजरे में रहकर गैरो के साथ उड़ने🕊️ का शौक रखते हो !!
रुकी हुई ज़िन्दगी का…एक और चलता हुआ दिन मुबारक…!!
तुम हिंदी का शब्द हो , में हूं गणित का सवाल , मेरा हल तो एक हैं ,तेरे अर्थ हजार ।
हादसा ज़िंदगी है आदमी की…साथ देगी भला ख़ुशी कब तक…!!
इंसान बड़ी अजीब फितरत का मालिक है…ये मरे हुये को रोता है… और जिंदो को रुलाता है…!!